शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

ममता का आँचल

देश में बच्ची बचाओ आन्दोलन चल रहा है फिर भी बच्चियों पर तिरस्कार का कहर जरी है । ऐसा ही मामला है लोहरदगा में देखने को मिला जब पॉँच साल की बेटी को ट्रेन में चढ़ा कर बाप ने छोड़ दिया ।
पॉँच साल की पूजा को उसके पिता ने रांची से लोहरदगा आ रही ट्रेन में बिठा कर खुद कहीं उतर गया । रांची से जब लोहरदगा पहुंची ट्रेन तो अपनी पिता को नहीं देख पूजा रोने लगी । जिसे देख किसी का दिल नहीं पसिझा तो उसी ट्रेन में रांची से आ रही रिटार्यड फौजी की पत्नी प्रेम मणि मिंज ने लड़की को लेकर स्टेसन मास्टर के पास पहुंची और एनाउंस करवया कई एक बार एनाउंस के बाद बाद भी कोई नहीं आया तो स्टेसन मास्टर ने लड़की को यह कहकर की किसी के आने के बाद लड़की को ले लेंगे । इस बाबत प्रेम मणि ने लड़की के घर तक पहुचने के लिए सदर थाने में भी रिपोर्ट की पर आज तक कोई नहीं आया । अब पूजा प्रेम मणि की पाचवी लड़की के रूप में ममता की परवरिश पा रही है ।पूजा अपने शहर का नाम रांची डोरंडा और पिता संतोस माँ दुर्गी का नाम याद है कहती है की पापा रिक्शा चलते हैं और माँ को रोज मारते हैं । अब हम घर नहीं जायेंगे यही बड़ी माँ के साथ रहेंगे । प्रेम मणि को अपनी बड़ी माँ कहती है और मुहल्ले के बच्चो के साथ - साथ खेलती अपनी भोली सूरत से घर ही नहीं महल्ले वासियो की भी चहेती बन गई है. प्रेम मणि के घर के आँगन में तो प्रेम का दृश्य देखते बनती है जब एक साथ जिमी शेरू बकरी के मेमना खेलते नजर आते हैं. तो भला इस घर को छोड़ पूजा कहाँ जाना चाहेगी .
बहरहाल प्रेम की गोद में पूजा उन लोगो के लिए सवाल है जो बेटा और बेटी में फर्क समझते हैं। जबकि अभी भी ममता के आँचल ममत्व से इतने भरे हैं की बच्ची पैदा करने वाली कोखों वाली माँ बौनी दिखाती है .

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