मंगलवार, 26 अक्टूबर 2010

आस्था के कई मिथक तोड़ती है यह मंदिर

यूँ तो भारत में कई अनूठे मंदिर भरे - पड़े हैं . लोहरदगा में भी ऐसा हीं एक मंदिर है जो शिल्प और दर्शन में अनोखा है... मंदिर में माँ दुर्गा कि दो प्रतिमाओं कि पूजा एक साथ कि जाती है. नवरात्र के महीने और दशहरा के त्योहार पर यह मंदिर और भी खास हो जाता है
लोहरदगा शहर से २५ किलो मीटर दूर रांची जिला के सीमांत छोटा सा क़स्बा है चट्टी, इसी चट्टी में है मा दुर्गा का अनोखा मंदिर . इस मंदिर का नाम है छत्तीस माता मंदिर . इस छत्तीस माता मंदिर कि खासियत है मंदिर में स्थापित माँ दुर्गा कि प्रतिमा . मंदिर के एक हीं कमरे में माँ दुर्गा कि दो प्रतिमाएं स्थापित कि गई है. माँ दुर्गा कि एक प्रतिमा है जो विशाल स्वरूप में है और एक प्रतिमा जो आकार में छोटी है.इस मंदिर कि स्थापना करने वाले जगतपाल बताते है .कि माँ दुर्गा दस भुजाओ के साथ संहारक रूप में पापीयों का दमन के लिए और माँ दुर्गा का छोटा रूप संसार में सुख शांति कि स्थापना के लिए है.
नवरात्र में दुर्गा के नौ रूपों कि पूजा अर्चना कि जाती है. इस लिए भी नव रात्र में छत्तीस माता मंदिर का महत्व काफी बढ़ जाता है. हालाकिं मंदिर माता कि दो प्रतिमाएं हैं लेकिन पूजा दोनों प्रतिमाओं कि एक साथ कि जाती है मंदिर को स्थानीय लोग मनोकामना सिद्धि का मंदिर मानते हैं. मनोकामनाएं पूरी होने के साथ हीं मंदिर के प्रति लोगो में आस्था और विश्वास बढ़ता जा रहा है .यही कारण है कि महिलाएं नवरात्री में इस मंदिर में विशेष पूजा अनुष्ठान के लिए आती हैं पुरे नव रात्र इस मंदिर में पूजा और जागरण किया जाता है.
इस छत्तीस माता मंदिर के ठीक बीच के कमरे में माँ दुर्गा कि स्थापित दोनों प्रतिमाएं कई मिथकों को दोड़ते हुए , आस्था और विश्वास कि नई परिभाषा गढ़ती है.. इस तरह यह मंदिर पुरे भारत में अपनी तरह का एकलौता मंदिर है, जो नई सोच और दर्शन का परिणाम है ,

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