आज महिलाओं को आधी आबादी कि संज्ञा दी जा रही है। लेकिन इस आधी आबादी को पूरा अधिकार नहीं मिल रहा है । अपनी शिक्षा के पूरी अधिकार के लिए लोहरदगा में महिलाओं ने एक आन्दोलन कि शुरुआत कर सभी को झकझोरने का प्रयास कर रही है ।
लोहरदगा के ये बच्चियां पहली बार अपने उंच्च शिक्षा के अधिकार और दुर्दशा के लिए आवाज उठा रही है। लोहरदगा के राजनितिक छवियो सामाजिक कार्यकर्ताओ पूंजीपतियो और शिक्षा विडो के सामने ये बच्चियां यही सवाल कर उठा रही है कि आखिर मुझे शिक्षा कयूं नहीं ? शिक्षको और बच्चियो कि मने तो उनमे आसमान छूने कि जूनून तो है लेकिन व्यवस्था और सुविधाओ के आभाव उन्हें शहर कि काल कोठरी से निकालने नहीं देती है ।
लोहरदगा में महिला उंचच शिक्षा को लेकर सामाजिक प्रशासनिक और राजनैतिक प्रयास अब तक नहीं हुए हैं। लोहरदगा जिले में अगर महिलाओ कि स्तिथि कि बात कि जाए तो करीब नब्बे हजार से अधिक महिला मतदाता हैं इसलिए भी तमाम मुद्दों के साथ राजनीतिज्ञों से सवाल उठ रहे हैं। कि आखिर शिक्षा सम्बन्धी उनके आशावासनो का क्या हुआ ।
बहरहाल लोहरदगा में महिला उंचच शिक्षा के तमाम सवालों के पीछे करण यही है कि यहाँ महिला शिक्षा के नाम पर मात्र एक कालेज है जहाँ १२वी तक कि पढाई होती है , यह स्तिथि पिछले तीस सालों से बरकार है । पहली बार अधिकार कि आवाज ने आन्दोलन किया है । शायद इस दस्तक से कोई राह खुल जाए ।
शनिवार, 6 फ़रवरी 2010
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