मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

बिन पैरों के दौड़ा राजधान

कहा जाता है कि इरादे बुलंद हो तो शारीरिक विकलांगता भी व्यक्ति के लिए कमजोरी नहीं बन सकती है इसे सच कर दिखाया है लोहरदगा के राजधान उराँव ने जो अपनी हौसले के बदौलत एक सफल मुकाम हासिल कर लिया है .
लोहरदगा के कुडू प्रखंड के सल्गिगओं निवासी राजधान उराँव . राजधान उराँव को जन्म से एक साल बाद ही पोलियो अटैक आया और राजधान उराँव उम्र भर के लिए पैर से विकलांग हो गए , बावजूद इसके राजधान ने अपनी दौर जरी रखी . अपने दैनिक कार्यो से लेकर शिक्षा तक के लिए राजधान ने खुद ही मशक्कत कि लेकिन परिवार कि आर्धिक तंगी के करण राजधान अपनी पठाई जरी नहीं रख पाए .
पढाई अधूरी रह जाने के बाद राजधान उराँव ने अपनी जीविका चलने के लिए व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रख लिया , आज राजधान के पास छोटी मोती चार बिजनेस हाथ में है. .अपनी विकलांगता को लेकर जनप्रतिनिधियो तक ने उअसकी बात नहीं सुनी . सरकारी उपेक्षा ने राजधान को और मजबूती प्रदान कि यहाँ तक कि राजधान ने सरकारी ट्राई साईकल न लेकर अपनी कमाई से मोटर ड्राई साईकल ली और एक आदर्श के रूप में उभरा .
किस्मत ने तो राजधान उराँव कि जिन्दगी कि गाड़ी रोक ही दी थी । लेकिन अपनी इच्छाशक्ति के दम पर राजधान ने ऐसी दौड़ लगाई कि सफलता के नए ऊंचाई को छू लिया . शायद यही करण है कि सरकारी सहायता लेकर वाह और पंगु होना नहीं चाहता था.

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