गुरुवार, 4 फ़रवरी 2010

शहीद का दर्द और राजनीती

शहीदों के माजर पर लगेगे हर वर्ष मेले , वतन पर मरने वालों का यही आखरी निशां होगा

शहीदों की मजार में हर बरस मेले लगने की बात तो होती है लेकिन लोहरदगा में शहीदों की श्रधान्जली के लिए लगने वाला मेला राजनितिक अखाडा बन गया है राजनीती इतनी हावी रही की तीन दशक पुरानी संस्कृति तहस नहस हो गयी ।
लोहरदगा जिला के कुडू प्रखंड अंतर्गत टिको पोख्राटोली में लरका आन्दोलन के शहीद हलधर गिरधर के समाधी स्थल में हर वारस मेला लगने की परम्परा है पिछले तीन दशको से अधिक समय से यहाँ आदिवासी और सदन एक साथ श्रधान्जली देते है वैदिक मंत्रौच्चारण के साथ यज्ञ हवन और पूजा के साथ साथ सरना धर्म अनुसार शहीद मेले का आयोजन यहाँ की साझी संस्कृति रही है ।
दरअसल इसबार शहीद स्थल में मेला भी लगा और श्रधान्जली भी दी गयी लेकिन राजनीती हावी रही । वीर बुधु स्मारक समिति और आदिवासी छात्रा संघ ने अपने अपने मंच बना लिए स्मारक समिति ने जहाँ स्वस्थ मंत्री बैधनाथ राम को मुख्या अतिथि बनाया गया वही आदिवासी छात्रा संघ ने विधायक कमल किशोर को मुख्या अतिथि चुना बाद में राजनितिक हस्तझेप के नकारात्मक प्रभाव को देखते हुए विधायक कमल किशोर भगत श्रधान्जली अर्पित कर लौट गाये । जबकि मंत्री बैधनाथ राम सभा अंतिम तक जमे रहे हालाँकि उन्होंने इस तरह की राजनीती को ही सही ठहरा दिया ।
बहरहाल इस राजनीती से स्थानीय बुजुर्ग खासे नाराज दिखे । राजनीती के इस खेल में शहीद की भावना तो आहत हुयी ही जनता को भी बाँट कर रख दिया ।

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