रविवार, 24 नवंबर 2013

मारडोना

बाक्साईट की नगरी लोहरदगा के आराहासा गांव में हुआ माराडोना फिल्म का टाईटल लांचिंग। फिल्म के निर्देषक दिलीप देव फिल्म एडिटर से फिल्म निर्देषन कि ओर रूख कर रहें है और अपनी निर्देषन में बालिका फुटबाल को लेकर मारडोना नाम से फिल्म बनाने के लिए पहल किया है। झारखंड के छोटे जिला लोहरदगा के आराहसा गांव से निकलकर मुंबई पहुंचे दिलीप देव ने कई फिल्मो में एडिटिंग का काम किया है। इस फिल्म के जरिए बालिका फुटबाल को परदे पर लाने का बीड़ा उठाया है। दिलीप देव अपने बचपन के यादो कि गाव में धान कि खेती के बाद खाली पड़े खेत को फुटबाल का मैदान बनाकर कैसे फुटबाल खेलते हैं और तमाम विपरीत परिस्तिथि में खेल के प्रति जुनुन को दिखाएगें। यह फिल्म झारखंड और छतीसगढ राज्य में फिल्माएगें। फिल्म की लाचिंग से गांव के लोगों में अभी से फिल्म को लेकर उत्साह है। चक दे इण्डिया में हाकी खेल और लगान में क्रिकेट को दिखया गया अब दिलीप देव फुटबाल के खेल को ले मारडोना बना रहें है।

मंगलवार, 31 जनवरी 2012


५८ वीं राज्य स्तरीय एथेलेटिक् मिट के समापन समारोह में लोहरदगा पहुंचे भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहमद अजहरउधीन.एक तरफ जहाँ झारखंडी रीती रिवाज के साथ इनका स्वागत हुआ वहीँ स्कूली छात्रो के द्वारा वेळकम सौंग गया गया. तीन दिनों से चल रहे लोहरदगा के ललित नारायण स्टेडियम एथेलेटिक्स मिट में आज का दिन अजहरउधीन के आने से लोहरदगा जिले के खेल प्रेमियों के लिए एक यादगार बन गया. जहाँ अजहरउधीन की एक झलक देखने और ऑटो ग्राफ और तस्वीर खीचने के लिए लोगों की क़तर बन गई थी. भारी संख्या में लोग खेल के मैदान में पहुंचे वही सादे लिवास में भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान अजहरउधीन भी खुब जंच रहे थे, लोहरदगा में चल रहे तीन दिवसीय एथेलेटिक्स मिट में झारखण्ड के इक्कीस जिले के प्रतिभागी भाग लिए वहीँ खिलाडी के बीच भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सह कांग्रेस के सांसद अजहरउधीन के आने से खेल में काफी उत्साहित दिखे ..

रविवार, 29 जनवरी 2012

सोहरी के आँगन की सांध्य पाठशाला



लोहरदगा सदर प्रखंड के हिसरी गाँव की पहचान बन गई है सोहरी के आँगन की सांध्य पाठशाला, शाम ढलते हीं सोहरी की आँगन में लगे सांध्य पाठशाला में बच्चे खींचे चले आते हैं गाँव के अशिक्षित माँ बाप के बच्चो के बीच शिक्षा की ज्योत जलाने का काम कर रही है गाँव की बहु सोहारी उरांव,परिवार की आर्धिक स्तिथि ख़राब होने के कारण खुद पाचवीं तक पढ़ी सोहरी, आज गाँव के बच्चो के बीच जला रही है शिक्षा की अलख, गाँव के चालीस छोटे - छोटे बच्चों के साथ घर के आँगन में चला रही है सांध्य पाठशाला. गाँव के बच्चे स्कूल से आने के बाद गाँव की गलियों उधम मचाते फिरते थे कोई भी शाम में पढाई नहीं करते थे. परिवार में माता-पिता का पढ़ा लिखा नहीं होने के कारण वे अपने बच्चो के स्कूल में पढ़ी गई किताबो और घर के लिए दिए गए टास्क को नहीं देखते हैं. ऐसे में गाँव के ये बच्चे सिर्फ स्कूल में पढ़ कर घर में नहीं पढ़ते है. इसलिए हीं सोहरी के मन में यह ख्याल आया और अपने घर के आँगन में सांध्य पाठशाला चलने की सोची और घर के दो बच्चों से शुरू किया तो आज तीन - चार महीने में गाँव के चालीस बच्चों का जमाव्रा होने लगा है और ये हर दिन दो घंटे इन बच्चो के शिक्षा में लगा रही है वह भी बिना किसी आर्धिक मदद के. फ़िलहाल, हिसरी गाँव में इन बच्चो के बीच शिक्षा का ज्योत जला रही सोहरी की हौसला हीं है कि गाँव के लोगों का शिक्षा की ओर झुकाव बढ़ा है . जरुरत है ऐसे प्रयास करने वाले को सरकारी सहायता दे कर इस छोटी सी पहल को गाँव-गाँव में शुरू कराने की ताकि गाँव के अशिक्षित माता पिता के बच्चों को एक अच्छी शिक्षा मिल सके ...

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2011

लोहरदगा विकास मोर्चा का झारखंड मुक्ति मोर्चा में हुआ विलय


लोहरदगा विकास मोर्चा का झारखंड मुक्ति मोर्चा में हुआ विलय। लोविमो के केंद्रिय अध्यक्ष पावन एक्का के नेतृत्व में लोविमो के सैकडो सदस्यों समेत कांग्रेस,भाजपा,आजसू व जनता दल यु के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने झारखंड मुक्ति मोर्चा में अपनी आस्था जताते हुए सदस्यता ग्रहण की।लोहरदगा पहुंचे उपमुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी को झामुमो कार्यकर्ताओं ने भव्य स्वागत किया व सैकड़ों की की संख्या मे झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा मोटरसाईकिल जुलूस निकाला गया जो शहरी क्षेत्र के विभिन्न चैक-चैराहों से होते हुए झामुमो नेताओं को कार्यक्रम स्थल छत्तरबगीचा तक स्काट करते हुए पहुंचाया।छत्तरबगीचा में आयोजित झामुमो की जन सभा सह मिलन समारोह में उपमुख्यमंत्री व कल्याण मंत्री के द्वारा लोहरदगा विकास मोर्चा के सुप्रिमो पावन एक्का को झामुमो का झंडा सौंप कर पार्टी का सदस्य बनाया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि जिले के युवा और उत्साही नेता में झामुमों का झंडा सौंपते हुए मुझे गर्व हो रहा है पावान के माध्यम से जिले ही नहीं आसपास के अन्य जिलो में भी पार्टी मजबूती के साथ आगे आयगी । और नए सदस्यों का स्वागत किया साथ ही सभा को संबोधित करते हुए कहा की झामुमो सरकार में शामिल हैं परंतु पूर्ण बहुमत नहीं मिल पाने के कारण लोकजन को इसका पुर्ण फायदा नहीं मिल पा रहा है।उपमुख्यमंत्री ने कहा कि झामुमो झारखंड के विकास को प्रतिबद्ध है और जो भी झारखंड के विकास की बात करेगा हम उसके साथ हैं।वहीँ कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी ने पार्टी में शामिल नए कार्यकर्ताओं का स्वागत किया ...

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

भाषा ने छुड़ाई देहरी और अंगना


आंध्र प्रदेश के मदन पल्ली की रहने वाली महिला भटक कर लोहरदगा में पहुंची महिला आज सेन्हा में प्रतिमा देवी की घर की सदस्य बन गई है . कहते हैं ममता किसी भाषा और शब्द की मोहताज नहीं होती . संवेदना को व्यक्त करने के लिए किसी भाषा की जरुरत नहीं होती मानव संवेदना को समझ हीं लेता है इसी का एक उदाहरण है यह महिला जिसे अपने घर के नाम पर इतना याद है की तमिलनाडु में घर है और बेटी दामाद आंध्र प्रदेश में है, तेलगु और तमिल भाषा बोलने वाली यह महिला को बस याद इतना हीं है की अपने दामाद के साथ बंगलौर एक शादी में आई थी जहाँ से वह अपने परिवार से बिछड़ गई और ट्रेन से झारखण्ड की राजधानी रांची और वहां से लोहरदगा के सेन्हा गाँव पहुँच गई . आदिवासी बहुल क्षेत्र के गाँव में इस अजनबी महिला को प्रतिमा देवी के रूप में एक सहारा मिल गया है दिन भर परिवार के साथ खेती बारी और दुसरे काम- काज में समय बिता रही यह महिला आज इस परिवार की एक सदस्य बन गई है ,घर की याद आने पर काफी बैचैन हो जाती है ,हिंदी न तो यह बोल पाती है और न समझ.लेकिन इशारों इशारों में इसने इस पराये घर को अपना बना लिया है.घर परिवार से मिलने के लिए मानो यह दोनों पहर सरसों या करंज तेल का दिया जलाकर अपनी घर वापस जाने की कामना अपने इष्ट देव से करती है.

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

गुरु द्रोण


लोहरदगा में नरेश लागुरी तीरंदाजी के क्षेत्र में अब तीरंदाजो के लिए गुरु द्रोण बन गए हैं . महाभारत के अर्जुन और अष्वत्थामा जैसे निशाने बाजों को तैयार कर रहें हैं . आदिवासी बहुल क्षेत्र लोहरदगा में कई महिला धनुर्धर को तैयार किया जो राज्य और देश से लेकर अमेरिका में भी अपनी निशाने बाजी का झंडा गाडा हैं नरेश लागुरी के धनुर्धरों ने. इसी का परिणाम है की छह साल पहले लोहरदगा के त्रिवेणी स्कूल से शुरू किए आर्चरी के प्रशिक्षण से इनके धनुर्धर ने पहली बार २००६ में स्कूली गेम्स से सामने आए लोहरदगा की प्रेरणा भगत और हर्षा भरद्वाज ने वर्ल्ड आर्चरी में भाग लिया और अमेरिका तक का सफ़र किया यहीं नहीं प्रेरणा ने २००८ में कांस्य पदक तक जीती .धनुष के अभाव में रबर से प्रैक्टिस किए स्कूल गेम्स में मेडल लाने के बाद झारखण्ड आर्चरी संघ ने धनुष दिए जिससे ये बच्चियां अमेरिका तक खेलने गई .
गुरु द्रोण के रास्ते चल पड़े हैं। तीरंदाजी की दुनिया में नये चेहरों को सामने लाना उनका शौक बन चुका है। इसी का नतीजा है कि इस आदिवासी बहुल क्षेत्र से प्रेरणा हर्षा और इन्द्राणी जैसे निषानेबाज अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को भेदने में सफलता पाई है। और यह सिलसिला जारी है। नरेश ने करीब छह साल पहले लोहरदगा के ग्रेटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में बच्चों की कला बगिया को सींचना शुरू किया था। आज वह प्रतिभा का खूबसूरत पार्क बन चुका है. गरीबी और अभाव के बीच केरल में पले-बढ़े नरेश लागुरी अपने अचूक निशाने की बदौलत १९९९ में सांई सेंटर में चुने गये।और अपनी अच्छे प्रदर्शन के कारण छह साल तक साईं से तीरंदाजी में खेलते रहे इस दौरान राज्य और रास्ट्रीय स्तर पर मैडल दिए . आज खिलाडी से कोच बने नरेश लागुरी मानते हैं आदिवासी बहुल क्षेत्र के बच्चो में शुरू से हीं तीर चलाने में के अलग हीं उर्जा दिखाई देता है जरुरत है बस इस तकनीक की और यही तकनीक प्रशिक्षण से हीं स्कूल की बच्चियां निशाने लगा रहीं हैं . और कहते हैं की अगर झारखण्ड आर्चरी संघ जिला इस और ध्यान दे तो यहाँ के बच्चे और भी आगे निकलेंगे .वहीँ आर्चरी की नॅशनल खिलाडी इन्द्राणी कुजूर कहती है की गुरु हमें टूटे धनुष और कमान और सन साधनों के कमी के बीच भी अच्छी तैयारी करते हैं यही कारण है की यहाँ के धनुर्धर सूबे में अच्छा कर रहें हैं. बहरहाल,आज जरुरत है ऐसे प्रतिभा को आगे लाने की और संसाधनों को पूरा करने की ताकि लोहरदगा जैसे पिछड़े क्षेत्र की बच्चियां और आगे जा सके . आज लोहरदगा और गुमला जिला के कई स्कूल में आर्चरी के क्षेत्र में नरेश लागुरी धनुर्धर की एक फ़ौज तैयार कर रहें हैं..