भारत स्काउट एण्ड गाइड में गाइड का अर्थ पथ प्रदर्शिका यानि सही
राह दिखाने वाली। सही राह दिखाने वाली ऐसे हीं दो नाम हैं परमिंदर कौर और
इभा घोष । बुढौती नसो में भी युवा उमंग प्रवाह रखने वाली इभा घोष और
परमिंदर कौर झारखंड बिहार में गाइड प्रशिक्षण की लिजेंण्ड बन चुकी हैं।
लोहरदगा उर्सुलाइन बीएड कालेज में भावी शिक्षिकाओं को गाइड का प्रशिक्षण
दे रही हैं । पांच सालो से 500 शिक्षिकाओं को प्रशिक्षण दिया है तो
झारखंड-बिहार में कितने हीं गाइड बहनो को दिक्षा दिलायी है।
झारखंड की प्रथम राज्य आयुक्त बनी परमिंदर कौर भाम्बरा आठ साल
की उम्र से हीं गाइड में है अपने परिवार को सुभांलते हुए परमिंदर कौर
अपने दोनों बच्चो समेत अपनी पोते पोतीयों को भी गाइड की प्रशिक्षण दे कर
रास्ट्रपति पुरुस्कार प्राप्त किया है। 1971 में गाइड की दिक्षा लीया और
1996 में संयुक्त बिहार की लीडर टेनर बनी ।
गाइड की वर्तमान राज्य प्रशिक्षण आयुक्त इभा घोष ने तो अपना जीवन
हीं समर्पित कर दिया है। इवा घोष अपनी तीसरी कक्षा में हीं गाइड के
बुलबुल ग्रुप से भाग लिया और गाइड में दिक्षा लेने के बाद विवाह नही करने
का निर्णय लिया । आज परिवार और सब कुछ त्याग कर इवा घोष गाइड को हीं
अपना सब कुछ बना बैठी है। संयुक्त बिहार में इवा सहायक राज्य संगठन
आयुक्त के पद पर कार्य किया और वर्तमान में झारखंड की राज्य प्रशिक्षण
आयुक्त के पद पर कार्यरत हैं ।
बहरहाल, झारखंड की दो बहन इभा घोष और प्रमिंदर कौर समाज गढने
में खुद को समर्पित कर दिया । वहीं पिछले 62 सालों से गाइड में
सेवा दे रही हैं।वहीं गाइड जीवन में रास्ट्रपति पुरुस्कार और दस जम्बुरी
कैम्प में भाग लिया है जो एक बडी उपलब्धी है। वहीं उम्र के इस पडाव में
स्काउट और गाइड के बच्चे बच्चीयों के बीच इभा दीदी, परमिदंर दीदी के
नाम से जानी जाती हैं।
मंगलवार, 24 मई 2011
शुक्रवार, 6 मई 2011
गुप्तकाल के स्वर्ण मुद्राएँ

लोहरदगा में हैं गुप्तकाल के स्वर्ण मुद्राएँ हैं झारखंड के पुरातत्व विभाग के कलेक्सन में भी नही हैं । चन्द्र गुप्त विक्रमादित्य मोर्य के काल के स्वर्ण मुद्रा यह अत्यंत दुलर्भ मुद्रा है । लोहरदगा के अपर बाजार स्थित कंचन ज्वेलर्स की गलैरी में हैं गुप्त काल के स्वर्ण मुद्राएँ । झारखंड पुरातत्वेता डा हरेन्द्र सिंहा ने बताया की इन दिन स्वर्ण मुद्राओं में एक मुद्रा बहुत हीं महत्वपुर्ण हैं वह है गुप्त काल के गोल्ड क्वाइंस । इस क्वाइंस में तीसरी चौथी शताब्दी के ब्राहमनी लिपी में स्पष्ट रूप से चंद्र लिखा हुआ है । और सिक्के के पिछे लक्ष्मी की तस्वीर है और आगे चंद्र गुप्त विक्रमादित्य की तस्वीर दी गइ है । दरअसल, लोहरदगा के व्यवसायी संजय बर्मन के क्लेकसन में कई तरह के पौराणिक ज्वेरात रखे गए हैं । और यही कारण है की इनके पास चंद्र गुप्त काल के स्वर्ण मुद्रा भी है । संजय बर्मण के क्लेक्षन में आादिवासीयों के द्वारा इस्नेमाल किए जाने वाले आभुषण से भरे परे है वे इस तरह के क्लेक्षन को अपना शौक माने हैं । वहीं डा हरेन्द्र सिंहा कहते हैं की लोहरदगा और गुमला के क्षेत्र में टांगी नाथ और अंजनी धाम हैं और गुमला जिले के कोटाम में पुर्व में गुप्त काल के सवर्ण मुद्रा मिले है । झारखंड के इतिहास में स्वर्ण चाँदी की ज्वेलरीयों और मुद्राओं को देखने के बाद यही लगता है की अखण्ड भारत पहले कितना समृद्धषाली व वैभव का काल था । यह बतलाता है की दो ठाइ हजार वर्ष पहले समाजिक समरसता आर्थिक सम्पन्ता रही होगी ।
गुरुवार, 5 मई 2011
लोहरदगा में हैं रॉक पेंटिंग और मेगालिथ

लोहरदगा में हैं रॉक पेंटिंग और मेगालिथ .जो मानव सभ्यता के इतिहास की रूप रेखा इंगित करती है .मेगालिथ जहाँ पूर्व में आदिवासी जनजाति समुदाय के लोग शव को दफनाते थे और चारो और से पत्थल से घेर देते थे .आज भी मौजूद हैं लोहरदगा के कोयल नदी के तट में .इतिहास में एक नया अध्याय बनेगा यह खोज.वहीँ नदी के बीच एक बड़े पत्थल में बना है रॉक पेंटिंग जो प्राज्ञेएतिहासिक काल के हैं .. दोनों का मिलना इस बात को साफ करता है की इस जगह की खुदाई की गई तो यह जगह मानव सभ्यता के इतिहास में एक नया अध्याय होगा . रॉक पेंटिंग में एक कूबड़ वाला बैल और दूसरी तरफ एक शेर का तस्वीर बनाया गया है ...
मंगलवार का दिन अमंगलकारी रहा लोहरदगा जिले के लिए
ग्यारह जवान शहीद और पचास से अधिक घायल हुए जवान
लोहरदगा जिला के सेन्हा थाना अंतर्गत धरधरिया क्षेत्र मंगलवार को बम के धमाकों से गूंज उठा . एक किलोमीटर के रास्ते में नक्सलीयों ने हरेक पांच मीटर पर एक लैंड माइंस बिछा रखे थे . जवानो के लैंड माइंस के रेंज में आते हीं नक्सलियों ने सीरिज लैंड माइंस ब्लास्ट कर दिया २० मिनट तक पूरी वादी में सिर्फ धमाके हीं धमाके थे उसके बाद सी आर पी ऍफ़ और पुलिस जवानो की चीखों से क्षेत्र भयवाह बना हुआ था .नक्सलियों ने बड़े हीं सुन्योजित ढंग से घटना को अंजाम दिया . सीरिज लैंड माइंस की तैयारी के लिए विशेष रूप से आंध्रप्रदेश के नक्सली इस इलाके में आए थे . लगभग दो महीने से लैंड माइंस के काम पर नक्सली लगे थे जिला पुलिस को इसकी हलकी फुलकी सुचनाये मिल रही थी लेकिन पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लग रहा था .मार्च के अंतिम सप्ताह में पुलिस ने जरुर भारी मात्र में विस्फोटक और डेटोनेटर बरामद किए थे. लेकिन भी पुलिस को लैंड माइंस की भनक नहीं लगी . इधर शुक्रवार २९ अप्रैल से नक्सलियों ने किस्को और सेन्हा गस्ती बढा दी थी . वहीँ पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों में मध्यान भोजन के अनाज की लुट को अंजाम दिया था उस समय भी जिला पुलिस ने सर्च अभियान चलाया खुद डी आई जी सम्पत मीणा बीते सप्ताह अभियान को लेकर लोहरदगा आयी हुई थी . पूरी घटना क्रम में नक्सलियों ने बड़े हीं सुन्योजित तरीके से पुलिस को सेन्हा क्षेत्र में बुलाया और लैंड माइंस के ऊपर से गुजरने को मजबूर किया जिस जगह यह घटना हुई वहां एक और १५० फिट की खाई तो दूसरी और पहाड़ है. वहीँ सामने लैंड माइंस बिछा था . जवानो को पीछे लौटने तक का ना मौका मिला . नक्सलियों ने विस्फोट के बाद लगातार गोली बारी करती रही एस बीच जवानो को सँभालने का मौका नहीं दिया . पूरी ब्लास्ट में घटना स्थल में चार जवान हीं शहीद हुए थे . लेकिन चिकित्साह के लिए जल्दी नहीं ले जाने के करण और सपोर्ट नहीं मिलने के करण शहीद जवानो की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई .साढ़े दस बजे की घटना में घायल जवान के लिए तीन बजे तक नहीं मिल पाया बचाव दल .
पानी के लिए तरस गए जवान बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल जवानो के साथ बचाव अभियान में लगे जवान भी प्यास से तड़प रहे थे वहीँ जिले के कप्तान असीम विक्रांत मिंज धर धरिया झरना के निचे नदी के किनारे जवानो को रोके हुए थे .ऊपर घायल जवान पानी पानी कर मर रहे थे और निचे जवान नदी के किनारे ठंढी छाव में घंटो बैढे इंतजार कर रहे .सी आर पी ऍफ़ के जवान रणजीत ने आँखों देखा हाल बतया की नक्सली ने पुलिस को अपने जाल में फ़साने के बाद विस्फोट से पहले आत्म सम्पर्पण करने के लिए लौड़ स्पीकर से बोल रहे थे की हथियार डाल दो नहीं तो मारे जाओगे . और यही हुआ नक्सलियों ने एक साथ लगभग १५० लैंड माइंस को एक सीरिज में उड़ा दिया मुठभेड़ के बाद एसपी के माना करने के बावजुद चार पांच की संख्या में जवान मिडिया कर्मियों के साथ धरधरिया झरना के ऊपर साके के रास्ते पहुंचे और घायल जवान को निचे मोटरसाइकल से उतारने लगे जिसमे दो जवान निचे आने के कर्म में हीं दम तोर दिए .वहीँ स्थानीय गाँव के लोगों ने भी खटिया में घायलों के निचे उतारने का काम किया . वहीँ बचाव दल जल्दी पहुँचता और हलिकप्तर की जल्दी व्यवस्था हो जाती तो शयद ये जवान की जान बच जाता .घटना के बाद पहुंचे आलोक राज आई जी आप्रेशन सी आर पी ऍफ़ के आई जी आप्रेशन आलोक राज ने चल रहे आप्रेशन पर सवाल उठाया है और कहा की चलाये जा रहे आप्रेशन के नेत्रित्व में गलती हुई है जिसके कारण जावन शहीद हो गए. ये आप्रेशन में हुई चुक का नतीजा है . आर के मालिक आई जी आप्रेशन झारखण्ड
घटना का जायजा लेने पहुंचे आई जी आर के मालिक ने कहा की घटना किसके द्वारा की गई है इसकी जानकारी है हम लोग इस पर गहन अध्यन कर रहे है ताकि इस तरह की घटना की पुन्राविरती ना हो और नक्सलियों के विरुद्ध चल रहे अभियान में कहा की यह आगे भी जारी रहेगा .
पुलिस मेंस के मंत्री ने झारखण्ड सरकार से इस अभियान के लिए काम से काम पांच हेलीकाप्टर की मांग किया है . और कहा की घटना स्थल में जल्दी हेलीकाप्टर पहुँचता तो जवान नहीं मारे जाते.
बहरहाल , जिले के एसपी को तीन दिन पूर्व हीं ख़ुफ़िया विभाग के हवाले से जानकारी दी गई थी की किस्को और सेन्हा के पहाड़ी क्षेत्र में नक्सलियों के बारूदी सुरंग बिछा रखा है बावजुद इसके पुलिस एलआरपी में बिना माइंस डीडेकटर लिए हीं निकल गए .अभियान में हुई बड़ी चुक का नतीजा निकला की ग्यारह जवान शहीद हो गए ...
लोहरदगा जिला के सेन्हा थाना अंतर्गत धरधरिया क्षेत्र मंगलवार को बम के धमाकों से गूंज उठा . एक किलोमीटर के रास्ते में नक्सलीयों ने हरेक पांच मीटर पर एक लैंड माइंस बिछा रखे थे . जवानो के लैंड माइंस के रेंज में आते हीं नक्सलियों ने सीरिज लैंड माइंस ब्लास्ट कर दिया २० मिनट तक पूरी वादी में सिर्फ धमाके हीं धमाके थे उसके बाद सी आर पी ऍफ़ और पुलिस जवानो की चीखों से क्षेत्र भयवाह बना हुआ था .नक्सलियों ने बड़े हीं सुन्योजित ढंग से घटना को अंजाम दिया . सीरिज लैंड माइंस की तैयारी के लिए विशेष रूप से आंध्रप्रदेश के नक्सली इस इलाके में आए थे . लगभग दो महीने से लैंड माइंस के काम पर नक्सली लगे थे जिला पुलिस को इसकी हलकी फुलकी सुचनाये मिल रही थी लेकिन पुलिस को कुछ भी हाथ नहीं लग रहा था .मार्च के अंतिम सप्ताह में पुलिस ने जरुर भारी मात्र में विस्फोटक और डेटोनेटर बरामद किए थे. लेकिन भी पुलिस को लैंड माइंस की भनक नहीं लगी . इधर शुक्रवार २९ अप्रैल से नक्सलियों ने किस्को और सेन्हा गस्ती बढा दी थी . वहीँ पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों में मध्यान भोजन के अनाज की लुट को अंजाम दिया था उस समय भी जिला पुलिस ने सर्च अभियान चलाया खुद डी आई जी सम्पत मीणा बीते सप्ताह अभियान को लेकर लोहरदगा आयी हुई थी . पूरी घटना क्रम में नक्सलियों ने बड़े हीं सुन्योजित तरीके से पुलिस को सेन्हा क्षेत्र में बुलाया और लैंड माइंस के ऊपर से गुजरने को मजबूर किया जिस जगह यह घटना हुई वहां एक और १५० फिट की खाई तो दूसरी और पहाड़ है. वहीँ सामने लैंड माइंस बिछा था . जवानो को पीछे लौटने तक का ना मौका मिला . नक्सलियों ने विस्फोट के बाद लगातार गोली बारी करती रही एस बीच जवानो को सँभालने का मौका नहीं दिया . पूरी ब्लास्ट में घटना स्थल में चार जवान हीं शहीद हुए थे . लेकिन चिकित्साह के लिए जल्दी नहीं ले जाने के करण और सपोर्ट नहीं मिलने के करण शहीद जवानो की संख्या में लगातार वृद्धि होती गई .साढ़े दस बजे की घटना में घायल जवान के लिए तीन बजे तक नहीं मिल पाया बचाव दल .
पानी के लिए तरस गए जवान बारूदी सुरंग विस्फोट में घायल जवानो के साथ बचाव अभियान में लगे जवान भी प्यास से तड़प रहे थे वहीँ जिले के कप्तान असीम विक्रांत मिंज धर धरिया झरना के निचे नदी के किनारे जवानो को रोके हुए थे .ऊपर घायल जवान पानी पानी कर मर रहे थे और निचे जवान नदी के किनारे ठंढी छाव में घंटो बैढे इंतजार कर रहे .सी आर पी ऍफ़ के जवान रणजीत ने आँखों देखा हाल बतया की नक्सली ने पुलिस को अपने जाल में फ़साने के बाद विस्फोट से पहले आत्म सम्पर्पण करने के लिए लौड़ स्पीकर से बोल रहे थे की हथियार डाल दो नहीं तो मारे जाओगे . और यही हुआ नक्सलियों ने एक साथ लगभग १५० लैंड माइंस को एक सीरिज में उड़ा दिया मुठभेड़ के बाद एसपी के माना करने के बावजुद चार पांच की संख्या में जवान मिडिया कर्मियों के साथ धरधरिया झरना के ऊपर साके के रास्ते पहुंचे और घायल जवान को निचे मोटरसाइकल से उतारने लगे जिसमे दो जवान निचे आने के कर्म में हीं दम तोर दिए .वहीँ स्थानीय गाँव के लोगों ने भी खटिया में घायलों के निचे उतारने का काम किया . वहीँ बचाव दल जल्दी पहुँचता और हलिकप्तर की जल्दी व्यवस्था हो जाती तो शयद ये जवान की जान बच जाता .घटना के बाद पहुंचे आलोक राज आई जी आप्रेशन सी आर पी ऍफ़ के आई जी आप्रेशन आलोक राज ने चल रहे आप्रेशन पर सवाल उठाया है और कहा की चलाये जा रहे आप्रेशन के नेत्रित्व में गलती हुई है जिसके कारण जावन शहीद हो गए. ये आप्रेशन में हुई चुक का नतीजा है . आर के मालिक आई जी आप्रेशन झारखण्ड
घटना का जायजा लेने पहुंचे आई जी आर के मालिक ने कहा की घटना किसके द्वारा की गई है इसकी जानकारी है हम लोग इस पर गहन अध्यन कर रहे है ताकि इस तरह की घटना की पुन्राविरती ना हो और नक्सलियों के विरुद्ध चल रहे अभियान में कहा की यह आगे भी जारी रहेगा .
पुलिस मेंस के मंत्री ने झारखण्ड सरकार से इस अभियान के लिए काम से काम पांच हेलीकाप्टर की मांग किया है . और कहा की घटना स्थल में जल्दी हेलीकाप्टर पहुँचता तो जवान नहीं मारे जाते.
बहरहाल , जिले के एसपी को तीन दिन पूर्व हीं ख़ुफ़िया विभाग के हवाले से जानकारी दी गई थी की किस्को और सेन्हा के पहाड़ी क्षेत्र में नक्सलियों के बारूदी सुरंग बिछा रखा है बावजुद इसके पुलिस एलआरपी में बिना माइंस डीडेकटर लिए हीं निकल गए .अभियान में हुई बड़ी चुक का नतीजा निकला की ग्यारह जवान शहीद हो गए ...
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