
लोहरदगा में नरेश लागुरी तीरंदाजी के क्षेत्र में अब तीरंदाजो के लिए गुरु द्रोण बन गए हैं . महाभारत के अर्जुन और अष्वत्थामा जैसे निशाने बाजों को तैयार कर रहें हैं . आदिवासी बहुल क्षेत्र लोहरदगा में कई महिला धनुर्धर को तैयार किया जो राज्य और देश से लेकर अमेरिका में भी अपनी निशाने बाजी का झंडा गाडा हैं नरेश लागुरी के धनुर्धरों ने. इसी का परिणाम है की छह साल पहले लोहरदगा के त्रिवेणी स्कूल से शुरू किए आर्चरी के प्रशिक्षण से इनके धनुर्धर ने पहली बार २००६ में स्कूली गेम्स से सामने आए लोहरदगा की प्रेरणा भगत और हर्षा भरद्वाज ने वर्ल्ड आर्चरी में भाग लिया और अमेरिका तक का सफ़र किया यहीं नहीं प्रेरणा ने २००८ में कांस्य पदक तक जीती .धनुष के अभाव में रबर से प्रैक्टिस किए स्कूल गेम्स में मेडल लाने के बाद झारखण्ड आर्चरी संघ ने धनुष दिए जिससे ये बच्चियां अमेरिका तक खेलने गई .
गुरु द्रोण के रास्ते चल पड़े हैं। तीरंदाजी की दुनिया में नये चेहरों को सामने लाना उनका शौक बन चुका है। इसी का नतीजा है कि इस आदिवासी बहुल क्षेत्र से प्रेरणा हर्षा और इन्द्राणी जैसे निषानेबाज अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं को भेदने में सफलता पाई है। और यह सिलसिला जारी है। नरेश ने करीब छह साल पहले लोहरदगा के ग्रेटर त्रिवेणी पब्लिक स्कूल में बच्चों की कला बगिया को सींचना शुरू किया था। आज वह प्रतिभा का खूबसूरत पार्क बन चुका है. गरीबी और अभाव के बीच केरल में पले-बढ़े नरेश लागुरी अपने अचूक निशाने की बदौलत १९९९ में सांई सेंटर में चुने गये।और अपनी अच्छे प्रदर्शन के कारण छह साल तक साईं से तीरंदाजी में खेलते रहे इस दौरान राज्य और रास्ट्रीय स्तर पर मैडल दिए . आज खिलाडी से कोच बने नरेश लागुरी मानते हैं आदिवासी बहुल क्षेत्र के बच्चो में शुरू से हीं तीर चलाने में के अलग हीं उर्जा दिखाई देता है जरुरत है बस इस तकनीक की और यही तकनीक प्रशिक्षण से हीं स्कूल की बच्चियां निशाने लगा रहीं हैं . और कहते हैं की अगर झारखण्ड आर्चरी संघ जिला इस और ध्यान दे तो यहाँ के बच्चे और भी आगे निकलेंगे .वहीँ आर्चरी की नॅशनल खिलाडी इन्द्राणी कुजूर कहती है की गुरु हमें टूटे धनुष और कमान और सन साधनों के कमी के बीच भी अच्छी तैयारी करते हैं यही कारण है की यहाँ के धनुर्धर सूबे में अच्छा कर रहें हैं. बहरहाल,आज जरुरत है ऐसे प्रतिभा को आगे लाने की और संसाधनों को पूरा करने की ताकि लोहरदगा जैसे पिछड़े क्षेत्र की बच्चियां और आगे जा सके . आज लोहरदगा और गुमला जिला के कई स्कूल में आर्चरी के क्षेत्र में नरेश लागुरी धनुर्धर की एक फ़ौज तैयार कर रहें हैं..