मंगलवार, 31 जनवरी 2012

५८ वीं राज्य स्तरीय एथेलेटिक् मिट के समापन समारोह में लोहरदगा पहुंचे भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहमद अजहरउधीन.एक तरफ जहाँ झारखंडी रीती रिवाज के साथ इनका स्वागत हुआ वहीँ स्कूली छात्रो के द्वारा वेळकम सौंग गया गया. तीन दिनों से चल रहे लोहरदगा के ललित नारायण स्टेडियम एथेलेटिक्स मिट में आज का दिन अजहरउधीन के आने से लोहरदगा जिले के खेल प्रेमियों के लिए एक यादगार बन गया. जहाँ अजहरउधीन की एक झलक देखने और ऑटो ग्राफ और तस्वीर खीचने के लिए लोगों की क़तर बन गई थी. भारी संख्या में लोग खेल के मैदान में पहुंचे वही सादे लिवास में भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान अजहरउधीन भी खुब जंच रहे थे, लोहरदगा में चल रहे तीन दिवसीय एथेलेटिक्स मिट में झारखण्ड के इक्कीस जिले के प्रतिभागी भाग लिए वहीँ खिलाडी के बीच भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान सह कांग्रेस के सांसद अजहरउधीन के आने से खेल में काफी उत्साहित दिखे ..
रविवार, 29 जनवरी 2012
सोहरी के आँगन की सांध्य पाठशाला

लोहरदगा सदर प्रखंड के हिसरी गाँव की पहचान बन गई है सोहरी के आँगन की सांध्य पाठशाला, शाम ढलते हीं सोहरी की आँगन में लगे सांध्य पाठशाला में बच्चे खींचे चले आते हैं गाँव के अशिक्षित माँ बाप के बच्चो के बीच शिक्षा की ज्योत जलाने का काम कर रही है गाँव की बहु सोहारी उरांव,परिवार की आर्धिक स्तिथि ख़राब होने के कारण खुद पाचवीं तक पढ़ी सोहरी, आज गाँव के बच्चो के बीच जला रही है शिक्षा की अलख, गाँव के चालीस छोटे - छोटे बच्चों के साथ घर के आँगन में चला रही है सांध्य पाठशाला. गाँव के बच्चे स्कूल से आने के बाद गाँव की गलियों उधम मचाते फिरते थे कोई भी शाम में पढाई नहीं करते थे. परिवार में माता-पिता का पढ़ा लिखा नहीं होने के कारण वे अपने बच्चो के स्कूल में पढ़ी गई किताबो और घर के लिए दिए गए टास्क को नहीं देखते हैं. ऐसे में गाँव के ये बच्चे सिर्फ स्कूल में पढ़ कर घर में नहीं पढ़ते है. इसलिए हीं सोहरी के मन में यह ख्याल आया और अपने घर के आँगन में सांध्य पाठशाला चलने की सोची और घर के दो बच्चों से शुरू किया तो आज तीन - चार महीने में गाँव के चालीस बच्चों का जमाव्रा होने लगा है और ये हर दिन दो घंटे इन बच्चो के शिक्षा में लगा रही है वह भी बिना किसी आर्धिक मदद के. फ़िलहाल, हिसरी गाँव में इन बच्चो के बीच शिक्षा का ज्योत जला रही सोहरी की हौसला हीं है कि गाँव के लोगों का शिक्षा की ओर झुकाव बढ़ा है . जरुरत है ऐसे प्रयास करने वाले को सरकारी सहायता दे कर इस छोटी सी पहल को गाँव-गाँव में शुरू कराने की ताकि गाँव के अशिक्षित माता पिता के बच्चों को एक अच्छी शिक्षा मिल सके ...
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