
मै दुर्गा हूँ ? जिन्दगी की विरोधी स्तिथियों से लड़कर लोहरदगा नगर के मुख्य चौराहे पावर गांज चौक के अर्धनिर्मित मकान की छत में जन्म लिया है दुर्गा ने . दुर्गा इसलिए की एक विक्षिप्त माँ के गर्भ से खुले आसमान के निचे बलुआही मिटटी के बिछौना में जन्म ली . इस विपरीत परिस्तिथि में जन्म लिया एक विक्षिप्त के गोद में बेटी स्वरूपा दुर्गा . महा नवमी के खुशियों के बीच कुवारी कन्याओं का पूजा अर्चना चल रहा है तो वहीँ दूसरी और विक्षिप्त मंजू के गर्भ से बेटी का जन्म शायद सुखद अनुभव रहा होगा . जिन्दगी और मौत के जद्दोजहद में जन्म हुई बेटी के आगमन में कोई सहयोग के लिए सामने नहीं था . ऐसे में सब कुछ अपने आप हो गया . जब आस पास के लोगो को इसकी भनक लगी तो आनन् फानन में उसे सदर अस्पताल पहुँचाया गया .
दरअसल , चंद महीने से विक्षिप्त मंजू शहर की अंधेर गलियों में घूम कर अपना जीवन यापन कर रही थी . इसी अँधेरी रात में समाज के भेड़ियों ने मंजू का अस्मत को तार तार कर दिया . आज हालत यह है की मंजू अपनी बेटी को सिने से लगाये सदर अस्पताल के बरामदे में भटकती नजर आ रही है बच्चे के प्रति ममता इतनी की वह किसी को बच्चे के आस पास भी फटकने नहीं देती और ना हीं डाक्टर और नर्स को हीं छूने देती है . सदर अस्पताल की डाक्टर स्मृत कहती है की बच्चे के जन्म के बाद मंजू शांत है लेकिन मानसिक बिमारी से ग्रसित है ऐसे में बच्चे की देख भाल में दिक्कत हो रही है वहीँ सदर अस्पताल के सिविल सर्जन राजकुमार बेक कहते हैं की जब तक मंजू के परिवार जनो का कोई अता पता नहीं चलता अस्पताल प्रबंधन देख भाल करेगी मानसिक रोग के डाक्टर से इलाज कराया जाएगा .
बहरहाल, संविधान ने तो राईट टू सरवाइव यानी जीने का मौलिक अधिकार तो दिया है लेकिन इस हालात में इस बेटी के जीवन को ले सवाल होना लाजमी हो गया है . वहीँ मंजू के जिद और बच्चे के प्रति प्यार मानो यह कह रही है की मै दुर्गा हूँ और समय से लडूंगी . मंजू के हालत समाज के सामने कई सवाल छोड़ दिया है . आखिर मंजू के साथ घिनौना कुकर्म करने वाला कौन है समाज के बीच छिपे इस महिसासुर का अंत कैसे होगा ..
